
मुंबई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे और देश की सबसे बड़ी बिजली कंपनी NTPC ने मिलकर एक बड़ा काम पूरा किया है। दोनों ने भारत का पहला ऐसा कुआँ खोदा है, जिसमें जमीन के अंदर कोयले और बलुआ पत्थर की परतों में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने की जाँच की जाएगी। यह कुआँ झारखंड के पाकड़ी बड़वाडीह इलाके में बनाया गया है, जो एक कोयला खदान के पास है। इसकी गहराई 1200 मीटर है। पहला कुआँ 15 नवंबर 2025 को पूरा हो गया, जबकि दूसरा कुआँ 21 दिसंबर 2025 से बनना शुरू हो चुका है।यह परियोजना नवंबर 2022 में नीति आयोग के सहयोग से शुरू हुई थी। इसमें NTPC की रिसर्च विंग NETRA और IIT बॉम्बे के अर्थ साइंस विभाग ने साथ मिलकर काम किया। सबसे पहले चार बड़े कोयला क्षेत्रों के लिए भारत का पहला भूवैज्ञानिक स्टोरेज एटलस तैयार किया गया। इस एटलस से पता चला कि इन क्षेत्रों में कितनी CO₂ गैस स्टोर की जा सकती है।परियोजना के मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर विक्रम विशाल ने बताया कि अब तक यह काम सिर्फ लैबोरेट्री में होता था, लेकिन अब इसे असल जमीन पर उतारा जा रहा है। आने वाले समय में इन कुओं से CO₂ गैस डाली जाएगी और उसकी निगरानी भी की जाएगी। शुरुआती अध्ययन से पता चला है कि उत्तर करणपुरा कोयला क्षेत्र में बहुत ज्यादा CO₂ स्टोर करने की क्षमता है। पाकड़ी बड़वाडीह ब्लॉक में 10 साल की अवधि में 15.5 मिलियन टन CO₂ गैस इंजेक्ट की जा सकती है।इससे पहले 2017 में IIT बॉम्बे और NTPC ने मिलकर देश का पहला CO₂ कैप्चर और उपयोग प्लांट बनाया था। यह प्लांट विंध्याचल में है और रोजाना 20 टन CO₂ गैस पकड़कर उसे मीथेन गैस में बदल देता है।यह पूरी परियोजना भारत के कार्बन कैप्चर, उपयोग और स्टोरेज (CCUS) प्रयासों को बहुत मजबूत बनाएगी। इससे देश कार्बन उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। यह पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के लिए बहुत बड़ा कदम है।
